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गाइड समाज कल्याण संगठन द्वारा प्रेस क्लब, लखनऊ में प्रेस वार्ता एवं संगोष्ठी आयोजित की

“पीड़ित पुरुषों के लिए एकमात्र समाधान – कानूनों का सख्त क्रियान्वयन, जवाबदेही और न्याय बहाल करने हेतु सुधार।"

रिपोर्ट: ज्ञानेश वर्मा

लखनऊ: हाल ही में मेरठ हत्या कांड, अतुल सुभाष, मनीष, निशांत सहित कई पुरुषों की आत्महत्या के मामलों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वैवाहिक विवादों, झूठे आरोपों और विवाहेतर संबंधों के कारण पुरुषों एवं परिवारों पर भारी संकट मंडरा रहा है।
आईपीसी 498ए (दहेज उत्पीड़न), घरेलू हिंसा अधिनियम और भरण-पोषण कानूनों के दुरुपयोग ने निर्दोष पुरुषों और उनके परिवारों को कानूनी, आर्थिक और मानसिक रूप से तोड़कर रख दिया है। कई मामलों में झूठे आरोपों से पीड़ित पुरुष आत्महत्या करने को मजबूर हो रहे हैं। यह स्थिति तत्काल कानूनी, सामाजिक, न्यायिक एवं पुलिस सुधारों की मांग करती है ताकि न्याय सुनिश्चित किया जा सके, दुरुपयोग रोका जा सके और परिवारों को बेवजह टूटने से बचाया जा सके।

गाइड सोशल वेलफेयर ऑर्गनाइज़ेशन द्वारा आयोजित प्रेस वार्ता की मुख्य बातें
गाइड समाज कल्याण संगठन द्वारा उत्तर प्रदेश प्रेस क्लब, लखनऊ में प्रेस वार्ता एवं संगोष्ठी आयोजित की गई, जिसमें कानून, मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक क्षेत्र के विशेषज्ञों ने झूठे आरोपों के बढ़ते मामलों और उनके सामाजिक प्रभावों पर चर्चा की।

मुख्य वक्ता:
डॉ. इंदु सुभाष – संस्थापक, गाइड संगठन, सामाजिक कार्यकर्ता रश्मि मिश्रा समाज सेविका
डॉ. आतीफा सालाउद्दीन- सेवा निवृत मुख्य चिकित्सा अधिकारी तसनीम अहमद अधिवक्ता
रत्ना सिंह – वरिष्ठ अधिवक्ता
सरोज शर्मा – सामाजिक कार्यकर्ता
सुलक्षणा टंडन – सामाजिक कार्यकर्ता
प्रो. सुषमा मिश्रा- शिक्षाविद् नागेंद्र सिंह चौहान प्रमोद सिंह, पवन उपाध्याय
अनुपम पाण्डेय- आदि पत्रकार बंधु डॉ. अरविंद अधिवक्ता शुभम यादव अधिवक्ता

वक्ताओं ने वैवाहिक कानूनों को लैंगिक-निरपेक्ष बनाने की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया ताकि परिवारों को बेवजह की कानूनी प्रताड़ना और मानसिक उत्पीड़न से बचाया जा सके।

हमारी प्रमुख माँगें:
1. लैंगिक-निरपेक्ष वैवाहिक और आपराधिक कानून – घरेलू हिंसा, विवाह से जुड़े कानूनी विवाद और यौन उत्पीड़न कानूनों को लैंगिक-निरपेक्ष बनाया जाए ताकि सभी को समान न्याय मिले।
2. झूठे मामलों पर कड़ी सजा – झूठे आरोप लगाने वालों पर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए ताकि कानूनों का दुरुपयोग रोका जा सके।
3. पुलिस और न्यायिक सुधार – पुलिस को किसी भी गिरफ्तारी से पहले निष्पक्ष जांच करने के निर्देश दिए जाएं और विवाह संबंधी मामलों के निपटारे के लिए एक अलग कानूनी निकाय का गठन किया जाए।
4. अनिवार्य काउंसलिंग एवं मध्यस्थता – कोर्ट में मामला दर्ज करने से पहले सुलह और काउंसलिंग को प्राथमिकता दी जाए ताकि बेवजह की कानूनी लड़ाइयों और मानसिक उत्पीड़न को रोका जा सके।
5. मानसिक स्वास्थ्य एवं आत्महत्या रोकथाम सहायता – झूठे आरोपों, उत्पीड़न और मानसिक तनाव से जूझ रहे पुरुषों के लिए विशेष हेल्पलाइन, कानूनी सहायता और मानसिक स्वास्थ्य परामर्श सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं।
6. वरिष्ठ नागरिकों को कानूनी उत्पीड़न से सुरक्षा – घरेलू हिंसा और भरण-पोषण कानूनों के दुरुपयोग के कारण कई बुजुर्ग माता-पिता कानूनी और आर्थिक उत्पीड़न का शिकार हो रहे हैं। सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उन्हें बेवजह कानूनी मामलों में न फंसाया जाए।

हमारी अपील:
एक न्यायपूर्ण समाज की नींव कानून के समान अनुप्रयोग पर टिकी होती है। मौजूदा कानूनी प्रणाली, जो पुरुषों पर झूठे आरोपों और कानूनी शोषण की अनदेखी कर रही है, समाज में असंतोष, टूटते परिवारों और आत्महत्या जैसी दुखद घटनाओं को जन्म दे रही है।

हम सरकार, न्यायपालिका और नागरिक समाज से आग्रह करते हैं कि लैंगिक-निरपेक्ष कानूनों को लागू करें ताकि समाज में संतुलन बना रहे और परिवारों को अनावश्यक कानूनी संकट से बचाया जा सके। यदि इन मुद्दों को जल्द हल नहीं किया गया, तो निर्दोष लोगों की जान जाती रहेंगी और परिवारों को अपूरणीय क्षति होगी।

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